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चंद्रयान 2 का पूरा बजट हॉलीवुड की फिल्म इंटरस्टेलर के बजट से भी कम है

चंद्रयान 1 की सफलता की यादें अभी भी ताज़ी हैं। अपने...

3 years ago
चंद्रयान 2 का पूरा बजट हॉलीवुड की फिल्म इंटरस्टेलर के बजट से भी कम है

चंद्रयान 1 की सफलता की यादें अभी भी ताज़ी हैं। अपने पहले अभियान में हीं इसने पानी की खोज कर ली थी। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो फिर एक बार चांद पर उपग्रह भेजने के लिए तैयार है। चाँद से जुड़े इस स्वदेशी अभियान के अंतर्गत चंद्रयान 2 का प्रक्षेपण इसी साल अप्रैल महीने में प्रस्तावित है। इस अभियान में इसरो पहली बार अपने यान को चंद्रमा की सतह, जो की चन्द्रमा का दक्षिणी ध्रुव का हिस्सा होगा पर उतारने की कोशिश करेगा। चंद्रयान 1 की सफलता से इसरो का आत्मविश्वास पहले से हीं बढ़ा हुआ है और ये बढ़ा हुआ आत्मविश्वास चंद्रयान 2 के माध्यम से नया इतिहास बनाने को अग्रसर है।

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी अपने क्वालिटी वर्क के साथ साथ अपने अभियानों पर खर्च करने वाले कम बजट के कारण भी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। जहाँ दूसरे देश ऐसे अभियानों पर बड़े बड़े बजट खर्च कर देते हैं वहीं भारतीय वैज्ञानिक बहुत कम बजट में सफलता हासिल कर लेते हैं। जहाँ चंद्रयान 1 में भारतीय वैज्ञानिकों ने सिर्फ 470 करोड़ रूपये खर्च किये वहीं चंद्रयान 2 में भी ये बजट ज्यादा नहीं बढ़ा है और सिर्फ 800 करोड़ रूपये में पूरा हो गया है।

चंद्रयान 1 के समय सोशल मीडिया पर एक पोस्ट बहुत वायरल हुई थी जिसमे कहा गया था की जितने बजट में हॉलीवुड में एक फिल्म ग्रेविटी बनी उससे कम बजट में भारतीयों ने अपना यान अंतरिक्ष में भेज दिया। चंद्रयान दो से भी एक ऐसा हीं तथ्य जोड़ा गया हैं। हॉलीवुड की एक और फिल्म है इंटरस्टेलर, अगर बजट के परिपेक्ष में देखें तो जितना बजट चंद्रयान 2 का हैं उससे 262 करोड़ रूपये ज्यादा खर्च करने पड़े है इंटरस्टेलर नाम की इस फिल्म को बनाने में। दुनिया आज अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की तरफ आश्चर्यचकित हो कर देख रही है की कैसे इतने कम बजट में वो इतने बड़े अभियानों को सफल बना रहे हैं।

आइये जानते है चंद्रयान 2 से संबंधित कुछ रोचक जानकारियाँ जो इसे बनती है दुनिया के किसी भी अंतरिक्ष अभियान से अलग और विशेष।

परमाणु शक्ति पर सवार है चंद्रयान

Source = Shortpedia

भारत के चंद्र अभियान के दूसरे कदम चंद्रयान 2 को परमाणु शक्ति का साथ प्रदान किया गया है। ये शक्ति इस मिशन को ज्यादा समय तक अंतरिक्ष में समय बिताने में मदद करेगा। इस शक्ति के लिए इसरो की मदद भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र ने की है। इसरो का चाँद पर छोड़ा गया पहला अभियान ईंधन की कमी के कारण करीब दस महीने में हीं ख़त्म हो गया था। इसी से सबक ले कर इस बार के अभियान के लिए ऐसे इंतजाम किये गए हैं। इसके बाद ऐसा आकलन किया गया है की चंद्रयान 2 करीब दो साल तक अपने अभियान को जारी रख पायेगा।

पूर्ण रूप से भारतीय अभियान

Source = India

साल 2010 में हीं ये तय कर लिया गया था कि चंद्रयान 2 के इस अभियान के लिए ऑर्बिटर को बनाने का काम इसरो खुद करेगा तथा इसके लैंडर का निर्माण रूस की अंतरिक्ष एजेंसी करेगी। पर बाद में ये निश्चित किया गया की इसरो खुद हीं लैंडर का भी विकास करेगा। फिलहाल इन सब के कई सफल परीक्षण अब तक किए जा चुके हैं। इस तरह अब हम कह सकते हैं की चंद्रयान 2 का ये अभियान अब पूरी तरह से एक भारतीय मिशन होगा।

ऐसे करेगा भारतीय लैंडर और रोवर खोज

Source = Pulplup

इसरो का कहना है कि भारत में निर्मित इस लैंडर को चंद्रयान चंद्रमा के साउथ पोल पर उतार देगा । लैंडर को उतारने के लिए फिलहाल चाँद की सतह पर दो अलग अलग लोकेशन को चिन्हित किया गया है। इनमें से हीं एक लोकेशन को जल्दी हीं फाइनल कर दिया जाएगा। इन दोनों लोकेशन में से किसी भी लोकेशन पर अभी तक किसी देश का लैंडर कभी नहीं नहीं उतरा है। इसरो के आकलन के मुताबिक चाँद के साउथ पोल की सतह नरम है और यहाँ रोवर के मूव करने में किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं आएगी । इस रोवर में छह चक्के होंगे और इसका भार 20 किलो का होगा । रोवर के लिए ऊर्जा की कोई किल्ल्त न हो इसके लिए इस को सूर्य की रौशनी से चलने वाले उपकरणों से लैस कर दिया गया है।

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